भाईदूज : जीवों की मुक्ति का पर्व

रजनी प्रभा

 देवामास कार्तिक के पंचमहापर्व में एक विशिष्ट पर्व है भाईदूज। इसे कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।भारतीय वांग्मय वेदों पुराणों में मानवीय जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए गोवर्धन, भैया दूज और चित्रगुप्त की उपासना का विधान है। कार्तिक मास के इस पावन पर्व को गोधन यमद्वितीया तथा भैया दूज भी कहा जाता है। जो वैवस्वत मन्वंतर से प्रारंभ है।भाइयों की खुशहाली तथा आयु वृद्धि के लिए बहनों द्वारा अत्यंत हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला भाईदूज का यह पर्व के अपने भाई के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास को अभिव्यक्त करता है।
 पौराणिक कथानुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान सूर्यदेव की पुत्री यामी ने अपने जुड़वें भाई यम से आग्रह किया कि-'आप मेरे यहां नहीं आते। नहीं मेरे हाथ का बना कुछ खाते हो ।सबके भाई उसके यहां आते-जाते हैं।तब सोचो मुझे कितना बुरा लगता है।' इस पर यमराज ने कहा- 'हम जरूर आएंगे'और फिर कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि कोई अपने सहयोगी चित्रगुप्त के साथ बहन के घर आते ही यमराज अपने कार्य को गिनाते हुए बहन से जाने का भी आग्रह करने लगते हैं।परंतु भाई को अपने घर आया देख प्रेम से वशीभूत यामी भाई से वचन ले ही लेती है कि वें उसके हाथ का भोजन करके ही जाएंगे । चूंकि यमराज और चित्रगुप्त जब तक जाएंगे नहीं मृत्युजीवों को उनके कर्मों की सजा नहीं दी जाएगी। अच्छे कर्म वाले तो स्वत:स्वर्गलोक प्रस्थान कर जाएंगे।मगर अधर्मियों का तो हिसाब होना ही होना है। यमी जिसे कालिंदी या यमुना भी कहा जाता है। वह भी हृदय से आम स्त्री समान ही थी, तो स्वाभाविक सी बात है कि, भाई को जाने देना नहीं चाहती थी।उसने घी में चावल डाल उसे धीमी -धीमी आंच पर पकाना शुरू किया। जिसका पहर, दोपहर में पकना असंभव था। यमराज समझ गए कि बहन उन्हें जाने नहीं देगी। उन्होंने कहा- 'मैं सब कुछ समझ गया। बोलो तुम्हारी क्या इच्छा है?' यमुना ने कहा-'आज के दिन जो भी मानव यमुना में स्नान कर अपनी बहन के हाथों का भोजन ग्रहण करेगा।उसे इक्षित वस्तु प्रदान करेगा। वह सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाएगा।चाहे वह कितना भी बड़ा पापी क्यों ना हो? यमराज ने 'तथास्तु' कह दिया।
 आज के दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथों का भोजन ग्रहण करते हैं। उनको अकाल मृत्यु नहीं सताती तथा भाई और बहन की सुख समृद्धि चीरकाल तक बनी रहती है।
 चूंकि यमराज के साथ चित्रगुप्त भी गए थे, जिनका कार्य मृतजीवों के कृत कर्मों का हिसाब लगाना है। अत: आज के दिन कार्य के बाधित रहने से किसी भी मृतजीव के कर्मों का ब्यौरा नहीं लग पाता है। अतः सभी जीवों को मुक्ति मिल जाती है। चूंकि यमुना भगवान कृष्ण की पत्नी या अष्टभार्या के रूप में जुड़ी है, तो उन्हीं के आग्रह पर सभी जीवों को आज बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

सृष्टि के निर्माण का विचार कर जब योगनिद्रा में मग्न भगवान विष्णु ने ब्रह्मा की उत्पत्ति अपने नाभि से की।तब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के क्रम में देव -असुर,गंधर्व -अप्सरा,स्त्री-पुरुष,पशु- पक्षी,सभी को जन्म दिया।इसी क्रम में जीवों को उनके कर्मानुसार न्याय देने हेतु यमराज की उत्पत्ति हुई।जिसे धर्मराज भी कहा जाता है। धर्मराज ने जब एक सहयोगी की मांग की तब ब्रह्मा ने हजारों वर्षों के तपोबल से चित्रगुप्त का प्रादुर्भाव हुआ। जिनके हाथों में कर्म की किताब, दवात और करवाल होता है। यह एक कुशल लेखक है। इन्हीं के लेखनी द्वारा जीवों को कर्मानुसार फल की प्राप्ति होती है।धर्मराज और चित्रगुप्त की पूजा आज के दिन करने और क्षमा मांगने से नरक का फल भोगना नहीं पड़ता है। यह आख्यान पद्मपुराण के सृष्टि खंड में वर्णित है।
आज इन्हीं चित्रगुप्त महाराज के 12 पुत्रों के वंशज समस्त कायस्थ समाज का विस्तार संपूर्ण भारत में कर रहे हैं।महाराज चित्रगुप्त के मंदिर संपूर्ण भारत में विद्यमान हैं। जिसमें से एक बिहार के पटना के दिवान मोहल्ले में नौजर घाट स्थित 'श्री चित्रगुप्त आदि मंदिर पटना' के रूप में विख्यात है। जिसकी स्थापना को लेकर अनेक मतभेद है।भाई दूज के दिन बहन के घर खाना खाने से भाई की आयु वृद्धि होती है। पहला निवाला बहन के हाथ से खाएं।दोनों को एक दूसरे को उपहार अवश्य देना चाहिए। स्कंद पुराण के अनुसार वस्त्र या आभूषण देना चाहिए।इस दिन बहन के घर खाने से दोनों को सुख, सौभाग्य,धन, धान्य,यश, एवम् दीर्घायु की प्राप्ति होती है। इस बार यह तिथि 26/27 दोनों दिन रहेगी। यम द्वितीया इस बार बुधवार 26 अक्टूबर 2022 को 2:45 से शुरू होगी और गुरुवार 27 अक्टूबर 2022 को 12:45 पर समाप्त होगी।सनातन धर्म के अनुसार भाई दूज की थाली में कलावा,रोली, अक्षत, नारियल, मिठाई और एक दीपक रखा जाता है ऐसा कहा जाता है। भाई दूज पर भाई को तिलक करने से उसका भाग्योदय होता है और अकाल मृत्यु का संकट टलता है। इसके बदले भाई अपनी बहन को उपहार देता है।

           नाम_ रजनी प्रभा
पता जरंगडीह, गायघाट,मुजफ्फरपुर,बिहार(843118)

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