कोरोना

🌷लघुकथा🌷                              
   सालों बाद सरला आंटी को बाजार में देख रमा की जिज्ञासा ये जानने की हूई,की आखिरकार वो बाहार क्यों और कैसे निकली?पास जाकर पुछी-----''नमस्ते आंटी कैसी है? आज बाजार में कैसे आना हूआ?'चहकते हुये सरला बोली------'बेटे और बहु घर आये हैं।अब सब यहीं रहेंगे।उन्हें तो काम से फुरसत नही मिलती,तो बच्चों का खयाल मैं रख लेती हूँ।उन्हीं के लिए सामान लेने आई हूँ।'रमा नें कहा----'सच में इस कोरोना नें तो कहर ही बरपा दिया है।कितनों की जानें चली गई,कितनें अपनी जगहों को छोड़ने पर मजबूर हो गए।सबकी जरें कमजोर कर दी इस कोरोन नें।सरला आंटी नें कहा-----'अरे नहीं रे रमा जिसके लिए कहर होगा उसके लिए।मेरे लिए तो वरदान है।वर्षों बाद मेरे बेटा-बहु बच्चों के साथ घर आए हैं,क्योंकी दोनों का ऑफ़िस घर से ही चल रहा है।बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन ही चल रही है।आज से पहलें तो ये लोग दो-तीन दीन से ज्यादा कभी न रुकते थे।अब तो कामवालियां भी नहीं मिलतीं इन्हें,तो बच्चों को कौन देखता?इसीलियें ये लोग वापस घर आ गए।मेरी तो जैसे दूनियाँ ही बदल गई ।'रमा बोली------'मगर आंटी आप अपना भी तो ख्याल राखिए।इस उमर में अगर कोरोना हो गया तो जान पर बन आयेगी'सरला हँसते हुए बोली------'अरे अब मौत और बिमारी का कैसा ड़र?मेरे बच्चें जो मेरे पास हैं।मुझें कुछ भी नहीं हो सकता,और अगर कुछ हूआ भी तो आराम और चैन से मर सकूंगी,क्योंकि अब मेरा परिवार मेरी आँखों के सामने जो है।'        

 नाम-रजनी प्रभा                         
 ग्राम-जारंगडिह,गायघाट,मुजफ्फरपुर,बिहार (843118)

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